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Central schemes related to science, research, innovation and startups will be implemented in West Bengal: Dr. Jitendra Singh

विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली. केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक विस्तृत बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप से संबंधित सभी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को पश्चिम बंगाल में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।

 

 

बैठक में क्षेत्रीय महत्व के दो प्रमुख निर्णय भी लिए गए। इनमें सीएसआईआर संस्थानों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के प्रभावित जिलों में आर्सेनिक विषाक्तता पर एक विशेष अध्ययन शुरू करना और प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों, कैंसर अस्पतालों तथा एम्स से जुड़े मेडिकल नेटवर्कों को शामिल करते हुए कैंसर और रोगाणुरोधी उपचारों पर सहयोगात्मक नैदानिक और दवा परीक्षण-संबंधी अनुसंधान शुरू करना शामिल है।

 

 

डॉ. सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास एक मजबूत वैज्ञानिक और शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान पहले से ही पूरे राज्य में कार्यरत हैं और अनुसंधान के उन्नत क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, नैदानिक परीक्षणों और अनुसंधान संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों तथा स्वास्थ्य सेवा नेटवर्कों को शामिल करते हुए नवाचार-आधारित सहयोग की भी अपार संभावनाएं हैं।

 

 

चर्चाओं का एक प्रमुख केंद्र बिंदु पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की छात्र-केंद्रित और महिला-केंद्रित योजनाओं का कार्यान्वयन था।

यह निर्णय लिया गया कि इंस्पायर, विज्ञान ज्योति, किरण योजनाओं का विस्तार किया जाएगा और उन्हें एक समन्वित तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि वैज्ञानिक सोच, नवाचार और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में छात्रों और महिलाओं की भागीदारी को मजबूत किया जा सके।

 

 

डॉ. सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के मेल से पूर्वी भारत में विज्ञान आधारित क्षेत्रीय विकास का एक नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।

इसके अलावा, यह भी निर्णय लिया गया कि कार्यान्वयन का एक रोडमैप तैयार करने के लिए राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा केंद्रीय वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करते हुए अगले कुछ दिनों के भीतर एक प्रारंभिक समन्वय बैठक बुलाई जाएगी।

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