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"Relief granted" without investigation? Questions raised about JDA's functioning in the Mangalam Ananda case

बिना जांच “राहत प्रदान” ? मंगलम आनन्दा मामले में JDA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जयपुर। राजधानी के आवासीय परिसर Manglam Aananda में कथित अवैध निर्माण और संरचनात्मक बदलावों की शिकायत के बाद अब Jaipur Development Authority (JDA) की कार्यप्रणाली खुद सवालों के घेरे में आ गई है। निवासियों का आरोप है कि गंभीर सुरक्षा जोखिम से जुड़े मामले में मौके पर प्रभावी जांच किए बिना ही Sampark Portal पर “राहत प्रदान की गई” दर्ज कर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।

 

शिकायतकर्ताओं के अनुसार 15 मई 2026 को JDA को विस्तृत शिकायत देकर बताया गया था कि फेज-1 के कई ब्लॉक्स — Rose, Tulip, Lily, Orchid, Lavender, Jasmine एवं Irish — में स्वीकृत भवन नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। आरोप है कि कई फ्लैटों में दो अलग-अलग बालकनियों के बीच के खुले हिस्से को जोड़कर विस्तारित बालकनियां बनाई गई हैं, जबकि कई पेंटहाउसों पर स्थायी रूफटॉप निर्माण भी कर दिए गए हैं।

 

निवासियों का कहना है कि यह केवल “सौंदर्य परिवर्तन” नहीं बल्कि भवन की मूल संरचना से छेड़छाड़ है, जिससे भविष्य में गंभीर हादसे की आशंका बन सकती है। बावजूद इसके, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि JDA के प्रवर्तन अधिकारी द्वारा न तो विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया गया और न ही किसी निर्माण को तत्काल रुकवाने की कार्रवाई हुई।

 

सबसे बड़ा सवाल Sampark Portal पर दर्ज उस टिप्पणी को लेकर उठ रहा है जिसमें लिखा गया:

“ज़ोन से जांच करवाई जाकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।”

इसके साथ ही पोर्टल पर “परिणाम / निस्तारण की स्थिति” में “राहत प्रदान की गई” भी दर्ज कर दिया गया।

अब निवासी पूछ रहे हैं —

  • जब जांच अभी “करवाई जाएगी”, तो राहत कैसे प्रदान कर दी गई?
  • क्या बिना साइट निरीक्षण शिकायत बंद करना केवल औपचारिकता है?
  • क्या JDA किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
  • यदि कल को कोई बालकनी या अवैध ढांचा गिरता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

निवासियों का आरोप है कि कई निर्माण कार्य आज भी खुलेआम जारी हैं और मेंटेनेंस एजेंसी द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई कठोर कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बहुमंजिला इमारत में मूल स्वीकृत संरचना से छेड़छाड़ भवन की भार-वहन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच, स्ट्रक्चरल ऑडिट और तत्काल प्रवर्तन कार्रवाई अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

अब यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सवाल JDA की जवाबदेही और प्रवर्तन तंत्र की गंभीरता पर भी खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि मामले में स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाई जाए और यदि बिना जांच शिकायत का निस्तारण किया गया है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।

“क्या JDA कार्रवाई तब करेगा जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?” — यह सवाल अब पूरे परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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