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सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर फैल रही अफवाहों को बताया बेबुनियाद, वैज्ञानिक आधार पर निगरानी जारी

नई दिल्ली.  पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को फिर से कहा कि पेट्रोल के लिए देश का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है और केंद्र सरकार लगातार इसकी निगरानी करती है।

बयान में कहा गया है, “केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) के बारे में कुछ गुमराह करने वाले और बिना किसी आधार के दावे देखे हैं, जिनका मकसद जनता को भ्रमित और गुमराह करना लगता है।”

बयान में यह भी कहा गया है कि सनसनी फैलाकर व्यूज पाने और इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के बारे में बेवजह चिंता पैदा करने की कोशिश में पुरानी तस्वीरें और वीडियो फिर से शेयर किए जा रहे हैं।

इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम 2003 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद कच्चे तेल के आयात को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊपन को बढ़ावा देना था।

इस प्रोग्राम को तकनीकी तैयारी और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के आधार पर चरणों में लागू किया गया है, और 2023 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग (ई20) की शुरुआत की गई है।

केंद्र सरकार तेल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, फ्यूल टेस्टिंग एजेंसियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लागू होने पर लगातार नज़र रखती है।

बयान में कहा गया है कि ई20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से, इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने या गाड़ी बंद होने जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।

इसमें यह भी कहा गया है कि अभी जो दावा फैलाया जा रहा है, वह इथेनॉल की नमी सोखने की प्रकृति (हाइग्रोस्कोपिक नेचर) से जुड़ा है।

यह आम बात है कि किसी भी फ्यूल के लिए, चाहे वह इथेनॉल-ब्लेंडेड हो या कोई और, फ्यूल टैंक में पानी का जाना ठीक नहीं है।

आधुनिक गाड़ियों में ऐसे डिज़ाइन फीचर्स और सुरक्षा उपाय होते हैं जो फ्यूल टैंक में पानी को जाने से रोकते हैं।

यह भी कहा गया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो बना और शेयर कर रहे हैं जिनमें गलत तरीके से दिखाया जा रहा है कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। ऐसे वीडियो फैलाने का मकसद मामले को सनसनीखेज बनाना और अपने व्यूज़ बढ़ाना लगता है।

बयान में कहा गया है कि ऐसा कंटेंट गुमराह करने वाला और बेबुनियाद है, क्योंकि फ्यूल ब्लेंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल स्थापित औद्योगिक प्रक्रियाओं से बनाया जाता है और पेट्रोल के साथ मिलाने से पहले कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता है।

बयान में कहा गया है, “इथेनॉल कई तरह के रॉ मटीरियल (फीडस्टॉक) से बनता है, जैसे गन्ने का रस, शीरा (मोलासेस), टूटे हुए चावल और मक्का, लेकिन इथेनॉल के गुण इस्तेमाल किए गए रॉ मटीरियल से बहुत अलग होते हैं क्योंकि यह कई प्रक्रियाओं से गुज़रता है, जिसमें फर्मेंटेशन (किण्वन) शामिल है, जिससे रॉ मटीरियल में मौजूद शुगर का फर्मेंटेशन होता है। भारत में इथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन की सख्त क्वालिटी शर्तों को पूरा करती है और इस्तेमाल से पहले इसकी कड़ी टेस्टिंग की जाती है। ज़्यादा ब्लेंडिंग लेवल को लागू करने का काम ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक तकनीकी मूल्यांकन और बातचीत के बाद ही किया गया है।”

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