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जानें, क्या है मुहूर्त ट्रेडिंग और इस साल क्या है इसका समय

नई दिल्ली| हर साल दिवाली के दिन भारतीय शेयर बाजार एक खास कारोबारी सत्र का आयोजन करता है, जिसे ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ कहा जाता है। यह एक घंटे का सत्र होता है, जिसे हिंदू लेखा वर्ष की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं और इसे संवत कहा जाता है। मुहूर्त ट्रेडिंग से पहले शेयर बाजार में ब्रोकर खातों की पूजा करते हैं।

कब होता है?

विशेष कारोबारी सत्र दिन के सबसे शुभ मुहूर्त में रखा जाता है। इस साल यह रविवार को शाम 6.15 बजे से 7.15 बजे तक चलेगा।

सत्र के लिए क्या है शेड्यूल?

ब्लॉक डील सेशन – शाम 5.45 बजे से 6 बजे तक
प्री ओपन – शाम 6 बजे से 6.08 बजे तक

नॉर्मल मार्केट : शाम 6.15 बजे से 7.15 बजे तक
कॉल ऑक्शन इललिक्विड सेशन – शाम 6.15 बजे से 7.15 बजे तक
क्लोजिंग सेशन – शाम 7.20 बजे से 7.30 बजे तक
ट्रेड मॉडिफिकेशन कट ऑफ टाइम – शाम 6.15 बजे से 7.40 बजे तक
आखिरी एक मिनट में रैंडम क्लोजिंग

क्या है इतिहास?

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है, जो 1957 से मुहूर्त ट्रेडिंग आयोजित करता आ रहा है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में इसकी शुरुआत 1992 से हुई। मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन कारोबार सांकेतिक तौर पर होता है। माना जाता है कि इस दिन थोड़ी मात्रा में शेयर खरीदना शुभ होता है। इससे पूरे वर्ष माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। दलाल स्ट्रीट के कुछ निवेशक अब भी मानते हैं कि इस दिन खरीदे गए शेयरों को बनाए रखना चाहिए, ताकि इन्हें अगली पीढ़ी को ट्रांसफर किया जा सके।

मुहूर्त ट्रेडिंग में सूचकांकों का कैसा रहता है मिजाज?

अब तक देखा गया है कि इस विशेष कारोबारी सत्र में बाजार का मिजाज सकारात्मक रहता है। लेकिन, ट्रेडिंग वॉल्यूम अमूमन कम रहता है। इस छोटे से सेशन के दौरान शेयरों की चाल भी एक सीमित दायरे में रहती है। पिछले 14 मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र में 11 बार बीएसई सेंसेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ है।

नए साल में क्या उम्मीद है?

विश्लेषक संवत 2076 को लेकर सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि अगले संवत तक निफ्टी 14,000 और सेंसेक्स 46,000 अंक के स्तर को पार कर जाएगा।

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