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Farmers are getting happy due to fencing in the fields, Nandlal's path became easy after getting grant

कृषि-बीज शोध एवं विकास को प्रोत्साहनः खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण

जयपुर। एक शक्तिशाली राष्ट्र के लिए कृषि क्षेत्र में एक मजबूत बीज प्रणाली का होना बहुत जरूरी है। भारत में लगभग 1.4 बिलियन की बढ़ती आबादी को भोजन देने के लिए खाद्य एवं पोषण की सुरक्षा पर ध्यान दिए जाने की जरूरत लगातार बनी हुई है। हमारी फसलों और जैविक संसाधनों पर अनेक जैविक और अजैविक दबाव जलवायु परिवर्तन जैसे अनेक कारणों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। दक्षिण एशिया में खाद्य सुरक्षा की स्थिति पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जोखिम उत्पन्न कर रही है। हाल ही में श्रीलंका, बांग्लादेश में खड़ा हुआ नया संकट, और पाकिस्तान में चल रहा संकट इस क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शोध एवं विकास में निवेश बढ़ाने की जरूरत के ठोस उदाहरण हैं।

उच्च गुणवत्ता के बीजों का निर्माण करने पर केंद्रित शोध

पॉलिसी एडवोकेसी रिसर्च सेंटर (Policy Advocacy Research Center) (पीएआरसी) द्वारा इस संदर्भ में अनेक संलग्नताओं के बाद यह निष्कर्ष निकला कि उच्च गुणवत्ता के बीजों का निर्माण करने पर केंद्रित शोध और विकास के साथ काम को आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है। सरकारी शोध संस्थानों द्वारा कुछ फसलों के सुधार के लिए अनुसंधान किया गया है, लेकिन बीज की शोध में निजी क्षेत्र का महत्व पिछले दो दशकों में कई गुना बढ़ चुका है। इसलिए इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत पहले से काफी ज्यादा हो चुकी है।

टैक्स छूट बढ़ाने से उद्यमों को इसमें ज्यादा संसाधन लगाने का प्रोत्साहन

निजी क्षेत्र में बीजों पर आरएंडडी के सहयोग के लिए दी जाने वाली रियायतें राष्ट्र पर वित्तीय बोझ के कारण व्यवहारिक नहीं हैं। पीएआरसी द्वारा की गई प्राथमिक शोध में सामने आया है कि बीज कंपनियों द्वारा आरएंडडी पर किए जाने वाले खर्च के लिए मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाने से उद्यमों को इसमें ज्यादा संसाधन लगाने का प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, घरेलू और क्षेत्र-विशिष्ट बीज फसलों की आरएंडडी गतिविधियाँ चलाने पर केंद्रित एमएसएमई उद्यमों के साथ काम करते हुए ज्यादातर उत्तरदाताओं का विचार था कि उनकी वृद्धि और उत्तरजीविता केवल ज्यादा आरएंडडी द्वारा हासिल किए जाने वाले विभेदीकरण पर निर्भर थी।

बीज में की जाने वाली शोध में भारी जोखिम

2016 से 2020 के बीच बीजों (बायोटेक्नॉलॉजी) के लिए आरएंडडी पर दी जाने वाली टैक्स छूट को 200 प्रतिशत से घटाकर 150 प्रतिशत कर दिया गया, जो आज 100 प्रतिशत है। बीज में की जाने वाली शोध में भारी जोखिम होता है, और जरूरी नहीं होता कि हर बार अपेक्षित परिणाम मिलें, लेकिन फिर भी इसे हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह लंबी चलने वाली एक कठिन प्रक्रिया है, जिसमें आम तौर से 7 साल का समय लगता है, और इस अवधि में भारत में मौजूद विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में परीक्षण के प्रोटोकॉल तैयार करने पड़ते हैं।

निवेश को बढ़ाने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने में मदद

आरएंडडी में निवेश को प्रोत्साहित किए जाने पर बल दिए जाने की जरूरत और मौजूदा परिस्थिति, जिसमें शोध पर रियायत देना वित्तीय रूप से व्यवहारिक नहीं है, इन दोनों संदर्भों में पीएआरसी के अध्ययन में सुझाव दिया गया कि बीज कंपनियों द्वारा शोध एवं विकास में किए जाने वाले खर्च पर 200 प्रतिशत टैक्स छूट की बहाली से शोध एवं विकास में उनके निवेश को बढ़ाने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।

प्रयोगशालाओं का आधुनिककीकरण

विक्रम शंकरनारायनन एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर पीएआरसी (Vikram Sankaranarayanan Executive Director PARC) के अनुसार, ‘‘हमारे अध्ययन में सामने आया है कि हम जब तक शोध एवं विकास को मजबूत वित्तीय प्रोत्साहन नहीं देंगे, तब तक भारत की निजी बीज कंपनियाँ पिछड़ती जाएंगी, जिनमें से कुछ विश्व में मजबूत स्थिति में संचालन करती हैं। यदि इन्हें बीज की बेहतर किस्मों का विकास करने के लिए शोध में किए गए निवेश पर प्रोत्साहन मिलेगा, तो वो इसमें और ज्यादा संसाधन लगाएंगी। इसके अलावा पीएआरसी अध्ययन की मुख्य अर्थशास्त्री, बनिशा बेगम शेख ने कहा कि आरएंडडी के लिए वित्तीय प्रोत्साहन से निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों को अपनी प्रयोगशालाओं का आधुनिककीकरण कर उन्हें अपने विकसित आर्थिक समकक्षों के समान बनाने में मदद मिलेगी।’’

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